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वकीलों का विषविद्यालय - लेखक आशुतोष शर्मा

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कानून की किताबें इंसान को न्याय सिखाती हैं, लेकिन हॉस्टल उसे जीवन का सबसे कठिन पाठ पढ़ाता है।

अद्वैत एक साधारण, संकोची और संस्कारों में पला युवक है। कानून की पढ़ाई के लिए विश्वविद्यालय पहुँचते ही उसके सामने एक ऐसी दुनिया खुलती है, जहाँ दोस्ती और दुष्संगति के बीच की रेखा धुँधली है; आदर्श और आकर्षण हर दिन टकराते हैं; और हर छोटी भूल भविष्य की किसी बड़ी कीमत में बदल सकती है।

केवल लॉ कॉलेज के दिनों का संस्मरणात्मक व्यंग्य नहीं है। यह भारतीय विश्वविद्यालय जीवन का जीवंत दस्तावेज़ है—जिसमें हॉस्टल की भूख है, दोस्ती की गर्माहट है, प्रेम की नासमझी है, छात्र राजनीति का शोर है, शराब और नशे का छलावा है, और इन सबके बीच अपने आप को खोजते एक युवा मन की बेचैनी भी।

लेखक ने हास्य और आत्मव्यंग्य की धार से उन अनुभवों को शब्द दिए हैं, जिन्हें अधिकांश लोग जीते तो हैं, पर स्वीकार करने का साहस नहीं जुटा पाते। हर प्रसंग पाठक को हँसाता है, चौंकाता है और कहीं न कहीं यह एहसास भी कराता है कि युवावस्था की सबसे बड़ी भूलें अक्सर सबसे बड़ी शिक्षाएँ बन जाती हैं।

यह उपन्यास किसी पीढ़ी का महिमामंडन नहीं करता, न ही नैतिक उपदेश देता है। यह केवल एक आईना सामने रखता है—जिसमें हॉस्टल, अदालत, दोस्ती, महत्वाकांक्षा और मनुष्य की कमजोरियाँ एक साथ दिखाई देती हैं।

जो लोग विश्वविद्यालय के दिनों को याद करना चाहते हैं, वे इस पुस्तक में अपने अतीत की झलक पाएँगे; और जो अभी उस दुनिया में प्रवेश करने वाले हैं, उन्हें यह पुस्तक हँसते-हँसते एक गंभीर चेतावनी भी दे जाएगी।

लेखक का नाम आशुतोष शर्मा है, जो ज़ाहिर तौर पर एक कानून स्नातक (लॉ ग्रेजुएट) हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय उनका मातृ संस्थान है। आशुतोष पिछले सोलह वर्षों से अधिक समय से वकालत में सक्रिय हैं और देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों के समक्ष नियमित रूप से पेश होते रहते हैं, साथ ही उन्होंने एक अधिवक्ता के रूप में माननीय भारत के सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष भी कई बार अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। आशुतोष आम जनता के लाभ के लिए अपने यूट्यूब चैनल @Lawofthelandindia के माध्यम से कानूनी जागरूकता भी फैला रहे हैं। उनका मानना है कि हमारा संविधान सर्वोपरि है और कोई भी राष्ट्र तभी समृद्ध हो सकता है जब वह कानून के शासन (रूल ऑफ लॉ) द्वारा संचालित हो।

वकीलों का विषविद्यालय - लेखक आशुतोष शर्मा

पृष्ठ 125 रू - 270.00

978-81-997064-2-2